Dikchu

एक बेहतर कल के लिए खुद को तलाशना  और तराशना बेहद आवश्यक है. जरुरत है खुद को वक़्त देने की, और अपने अंतर्मन से जुड़ने की. जब हम प्रकृति के बेहद करीब होते हैं यानि अपनी सृष्टिकर्ता की बारीक़ नक्काशियों को परख रहे होते हैं तब कहीं न कहीं हम अपने अंतर्मन को एक नया आयाम दे रहे होते हैं. आइये चलते हैं दिक्छु, जो बसा है उत्तर सिक्किम की सुरम्य वादियों में. एक छोटा सा क़स्बा, पर अद्भुत, अतुलनीय, अविस्मरणीय. अपने आगोश में न जाने कितनी ही खूबसूरती और निर्मलता समेटे हुए. महानगरों की भागमभाग से इतर यहाँ सुकून की चंद सासें आपमें नई ऊर्जा का संचार करती हैं. निर्मल मुस्कुराती हुई आँखें, स्वागत करते निश्छल लोग बरबस ही आपके अंदर की वितृष्णा और विरक्ति को विलुप्त कर देते है. जहाँ कलकल बहती हुई तीस्ता जीवन को निरंतर चलायमान रखने का सन्देश देती है, वहीँ हरे भरे विशाल पहाड़ अपनी नैतिक अडिगता को कायम रखने का पैगाम देते है. यहाँ के लोगों का सादा एवं सरल जीवन और वो भी प्रकृति के इतने करीब हमें जरूर सोचने पर विवश करता है, की इंसान को एक सरल जीवन के लिए बहुत कुछ संसाधनों की आवश्यकता नहीं है. जरूर जाएँ – सिंगताम बाजार से दुरी 32 किलोमीटर.